कुछ

इतना ज़हर मत दो की मैं तड़पता ज़िंदा रहूँ
इतनी दवा मत दो की मैं तड़पता मर जाऊ ॥

ज़हर

तुम्हारे दिल का जो ज़हर है,
इसका बहुत बड़ा कहर है
छोटी छोटी चिंगारियां उठती है,
जो मिलकर एक दिन सब भस्म कर देती है ॥

आदत

मौत की सताने की आदत नहि, वो एक बार ही आति है
फिक्र करना मेरी फीत्रत है, रोज मुझे बेबस karne ki उस्की आदत है